चकिया- अमृत महोत्सव के काल में भी स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति उपेक्षा का शिकार,

जिला संवाददाता कार्तिकेय पांडेय

चकिया- अंग्रेजों के शासन से देश को आजाद कराने के लिए महापुरुषों के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का भी अहम योगदान रहा।जिनकी याद में विभिन्न तहसील एवं ब्लॉक मुख्यालय पर स्मृति स्थल बनाया गया है।और प्रत्येक राष्ट्रीय पर्व के अलावा भी अन्य महोत्सव पर उनको याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। लेकिन कुछ ऐसे जगह हैं,जहां अधिकारियों की लापरवाही से अब स्वतंत्रता सेनानियों का स्मृति स्थल उपेक्षा के चलते बदहाल हो गया है।और लोग स्वतंत्रता सेनानियों की यादें भूलते जा रहे हैं।

आपको बताते चलें कि चकिया तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों के रहने वाले लगभग 140 ऐसे लोग थे।जो कि देश को आजाद कराने में अपना योगदान दिया।जिनको स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से जाना जाता है।और विभिन्न विकास खण्ड मुख्यालय पर इनका नाम बड़े अक्षरों में अंकित है। लेकिन वहीं अगर तहसील स्तर पर बात की जाए तो तहसील परिसर में गांधी स्मृति भवन व सेनानी कार्यालय का निर्माण किया गया है। इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानियों के नाम की सूची भी लगाई गई है। लेकिन अगर देखा जाए तो वर्तमान समय में अमृत महोत्सव के काल में भी स्वतंत्रता सेनानियों का स्मृति उपेक्षा का शिकार हो गया है। और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का ध्यान बिल्कुल भी तहसील प्रशासन द्वारा नहीं रखा जा रहा है।

वही देखा जाए तो सेनानी कार्यालय के पास तहसील के नौकरशाहों का पेशाब खाना बन गया है। और उसके चारों तरफ गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हुआ है। कई बार तहसील के अधिकारियों के साथ साथ जिला प्रशासन से भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों के साथ साथ अन्य लोगों ने अपील किया कि बंद रहने वाला भवन खुलना चाहिए। और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की अंकित की गई सूची पीछे ना हो करके तहसील परिसर में आगे की तरफ लगाया जाए। जिससे तहसील में आने वाले लोग भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की यादों को जान सकें।

अब देखना यह होगा कि क्या मामला संज्ञान में आने के बाद तहसील के नौकरशाहों पर इसका असर पड़ता है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की लगाई गई सूची तहसील परिसर में पीछे ना होकर आगे की तरफ लगाई जाती है, और ध्यान रखा जाता है या फिर इसी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।

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